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इजरायल-गाजा युद्ध की तस्‍वीरों की कहानी दे रही है खून और आंसुओं का हिसाब

7 अक्टूबर को इजरायल और उसके बाद फिर गाजा में जारी महायुद्ध में बहुत कुछ दांव पर लगा हुआ है. हमास ने इस महासंग्राम की पहल 1300 इजरायलियों का कत्‍ल करके की. और फिर तब से अब तक इजरायल के जवाबी हमले में गाजा के तकरीबन 4000 लोग मारे जा चुके हैं. हमास और इजरायल के परस्‍पर हमलों की तस्‍वीरें सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं. लेकिन, इन सबके बीच पर्दे के पीछे कई देश अपने अपने राजनीतिक-कूटनीतिक मकसद साधने में लगे हुए हैं. कुलमिलाकर, इजरायल-गाजा युद्ध का निष्‍कर्ष ये है कि मौत किसी की सगी नहीं है. वो किसी को मोहलत नहीं देती है. बर्बरता पर किसी का कॉपीराइट नहीं है. और खून की खेती करने वालों के लिए युद्ध से माकूल मौसम कोई नहीं होता.

लाशें इजरायली-फिलिस्‍तीनी हो सकती हैं, विलाप नहीं:

7 अक्‍टूबर को हमास के आतंकियों ने दक्षिणी इजरायल में लाशों के ढेर लगा दिये. मृतकों के परिवारजनों के आने तक लाशों की निगरानी कर रहा इजरायली सैनिक अपनी भावनाएं काबू में नहीं रख पाया. जबकि, दूसरे चित्र में ऐसा ही विलाप गाजा में देखा जा सकता है, जहां लाशें उठाने के लिए कंधे कम पड़ गए हैं.

युद्ध की दरिंदगी बनाम औरतों का दर्द:

हमास के दरिंदों ने अपनी करतूत को शान समझकर जो कुछ शुरुआती वीडियो जारी किये थे, उसी में से एक में इजरायली युवती नोआ अर्गामानी भी दिखाई दी. दक्षिण गाजा के म्‍यूजिक फेस्टिवल में खूनी खेल खेलने वाले हमास के आतंकी यहीं से नोआ और उनके बॉयफ्रेंड अविनातन को अगवा करके गाजा ले गए हैं. वहां उन पर क्‍या बीत रही है, यह कोई नहीं जानता. जबकि, दूसरे चित्र में  स्‍पेन में रह रही फिलिस्‍तीनी युवती गाजा को लेकर परेशान है. अपने चेहरे पर फिलिस्‍तीनी ध्‍वज लगाए इस युवती के पास इजरायली हमलों से अपने परिजनों की कुशलता की कामना करने के अलावा दूसरा कोई चारा नहीं है.

जले हुए इजरायली टैंक का बदला तोप ले रही है:

हमास के आतंकियों ने 7 अक्‍टूबर को सिर्फ आम नागरिकों का ही कत्‍लेआम नहीं किया. उनके निशाने पर गाजा से सटे इजरायली सैनिक ठिकाने भी आए. पहले चित्र में जलते हुए इजरायली टैंक पर सवार होकर जश्‍न मनाते दिख रहे हमास के लड़ाके टैंक में सवार सैनिक की हत्‍या कर चुके थे. लेकिन, शायद वो यह नहीं जानते थे कि जब इजरायली की बारी आएगी तो इस टैंक का बदला लेने इजरायली तोप लौटेगी. दूसरे चित्र में है दक्षिणी गाजा में  दिन-रात आग उगल रही इजरायली हॉवित्‍जर तोप. हमास के आतंकियों की करतूत का खामियाजा गाजा के आम निवासियों को भुगतना पड़ रहा है.

हमास की हैवानगी के जश्न का पलायन:

जिस दिन हमास ने दक्षिणी इजरायल में कत्‍लेआम किया, उस दिन फिलिस्‍तीनियों ने जमकर जश्‍न मनाया. इस जश्‍न में औरतें और बच्‍चे भी दिखाई दिये. कहा गया कि यह इजरायल से बरसों के संघर्ष का इंतेकाम है. लेकिन, जब इजरायल ने पलटवार किया तो दूसरी तस्‍वीर सामने आ गई. 7 अक्‍टूबर को मनाया जा रहा जश्‍न अब मातम में बदल गया है. जश्‍न मनाने वाले कई लोग इजरायली हमलों में या तो मारे जा चुके हैं, या फिर अपने परिजनों के जान-माल की तबाही का दुख मनाते हुए गाजा से पलायन को मजबूर हैं.

…और, दोनों ओर की बदहाल आबादी के नेता सूट-बूट में सेफ हैं:

पहले इजरायल और फिर गाजा. दोनों ओर आम नागरिक ही हिंसा की भेंट चढ़े, और चढ़ते ही जा रहे हैं.  जबकि दोनों ओर का नेतृत्‍व सूट-बूट में किसी सेफ लोकेशन पर उच्‍चस्‍तरीय भेंटवार्ता कर रहा है. पहली तस्‍वीर है कतर में हमास के नेता इस्‍लाइल हानिये और ईरान के विदेश मंत्री होसेन अमिर अब्‍दुल्‍लाहैन की मुलाकात का. जबकि, दूसरे फोटो में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्‍याहू तेल अवीव के एयरपोर्ट पर अमेरिकी राष्‍ट्रपति जो बाइडेन को रिसीव कर रहे हैं. इन दोनों ही मुलाकातों के नतीजे में किसी अमन की उम्‍मीद नहीं की जा सकती है.

कुछ ऐसा है इजरायल-गाजा युद्ध का राजनीतिक जोड़-घटाव…

1. हमास के आतंकियों ने अल्‍लाहू-अकबर के नारे के साथ निर्दोष नागरिकों को जिस तरह मौत के घाट उतारा, उसने सबसे ज्‍यादा फिलिस्‍तीनी संघर्ष को नुकसान पहुंचाया.

2. अब तक पश्चिमी देशों में काफी हद तक यह भाव था कि इजरायल ने फिलिस्‍तीन का हक मारा है, लेकिन हमास के हमले ने इजरायल और फिलिस्‍तीन दोनों के बारे में राय बदल दी है.

3. हमास की बर्बरता ने भारत जैसे कई तटस्‍थ देशों को इजरायल के पक्ष में बयान देने को मजबूर किया है.

4. सऊदी और यूएई के संयमित व्‍यवहार ने अरब देशों की राजनीति को दो हिस्‍सों में बांट दिया है.

5. हमास के नाम पर ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ अब ईरान, पाकिस्‍तान, मलेशिया, तुर्की जैसे देशों में ही दिखाई दे रहा है.

6. जिस तरह से यूरोप, अमेरिका और कनाडा में प्रो-हमास प्रदर्शन हुए हैं, उसने पश्चिमी देशों की आंखें खोल दी है.

7. गाजा के अस्‍पताल पर हमले और शरणार्थी समस्‍या ने इजरायल पर दबाव बढ़ाया है, लेकिन अमेरिकी राष्‍ट्रपति के इजरायल दौरे के बाद गाजा पर कार्रवाई और तेज होने की उम्‍मीद है.

8. फिलिस्‍तीन की राजनीति में भी तेजी से बंटवारा हो रहा है. वेस्‍ट बैंक में रहने वाले राष्‍ट्रपति महमूद अब्बास ने हमास से किनारा कर लिया था. और PLO को ही फिलिस्‍तीन का एकमात्र प्रतिनिधि बताया है.

9. आखिर में यही लगता है कि गाजा में फिलिस्‍तीनी रहेंगे या नहीं, लेकिन वहां हमास का नामोनिशान नहीं होगा.

10. अंत में यह भी तय है कि गाजा में हमास रहे न रहे, लेकिन दुनिया में हिंसा का विचार और तेजी से फैलेगा. कौन सही है, और कौन गलत, इस बात का फैसला इसी बात पर होगा कि हिंसा की इस राजनीति में आप किस तरफ हैं.

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