कभी सैनिकों का अपहरण तो कभी ड्रोन शूटआउट… वो पांच मौके जब Iran-Pakistan बॉर्डर पर गरजीं बंदूकें

0
28

ईरान और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर तनाव है. शुरुआत 16 जनवरी से होती है. ईरान ने पाकिस्तान में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक कर दी. वहां बलूचिस्तान के कूह सब्ज इलाके में बेलस्टिक मिसाइलें और ड्रोन अटैक किए. आतंकी संगठन जैश-अल-अदल के दो मुख्यालयों को ध्वस्त कर दिया. घटना पर पाकिस्तान ने ऐतराज जताया और 2 दिन बाद ही 18 जनवरी को दावा कि Pakistan Army ने ईरान के अंदर ‘आतंकवादियों के ठिकानों’ पर हमला किया है.

पाकिस्तान का भी आरोप है कि ईरान में आतंकी समूह शरण लिए हैं और वो पाकिस्तान में सुनियोजित हमले करते हैं. हालांकि, यह पहली बार नहीं है, जब पाकिस्तान-ईरान बॉर्डर पर तनाव बढ़ा है. पांच ऐसे मौके भी आए हैं, जब दोनों देशों के बॉर्डर पर बंदूकें गरजीं. इतना ही नहीं, कभी सैनिकों का अपहरण किया गया तो कभी ड्रोन शूटआउट की घटनाएं भी सामने आई हैं.

‘एयरस्ट्राइक के बाद बौखला गया पाकिस्तान’

फिलहाल, ईरान की ओर से एयरस्ट्राइक के बाद पाकिस्तान बौखलाया हुआ है. पाकिस्तानी मीडिया ने ईरान में आतंकी ठिकानों पर हमले का दावा तो किया है, लेकिन ये हमला कब और कहां पर किया गया, इसे लेकर अभी तक कोई जानकारी सामने नहीं आई है. पाकिस्तान दावा करता रहा है कि ईरान के अंदर बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी और बलूचिस्तान लिबरेशन फोर्स जैसे बलूच अलगाववादी उग्रवादी समूह सक्रिय हैं, जो पाकिस्तान विरोधी गतिविधियों को अंजाम देते हैं. हमलों को लेकर ईरान या पाकिस्तान की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है.

‘राजनयिक संबंध भी टूटने की कगार पर’

पाकिस्तान ने आरोप लगाया कि ईरान ने हमारे हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया है. इस्लामाबाद की बयानबाजी ईरानी हमलों के कारण बढ़ते संकट की ओर इशारा कर रही है. दोनों देशों के एक-दूसरे पर हमले करने की घटनाओं के बाद राजनयिक संबंध भी टूटने की कगार पर हैं. बुधवार को पाकिस्तान ने हमले की निंदा की और तेहरान से अपने राजदूत को वापस बुला लिया. वहीं, ईरान अभी अपने राजदूत को पाकिस्तान नहीं भेजेगा. पाकिस्तान में तैनात ईरानी राजदूत वर्तमान में ईरान का दौरा कर रहे हैं. वे फिलहाल इस्लामाबाद नहीं लौटेंगे. 

इससे पहले भी दोनों देशों को अपने 900 किमी लंबे बॉर्डर पर अक्सर तनाव का सामना करना पड़ा है. यहां हिंसा की कुछ ऐसी घटनाएं हुईं हैं, जिसकी वजह से पड़ोसी देशों के बीच राजनयिक संबंधों में खटास पैदा होती रही है.

दिसंबर 2023

जैश अल-अदल (Army of justice) को ईरान ने ‘आतंकवादी’ संगठन के रूप में ब्लैक लिस्ट में रखा है. इसे पाकिस्तान का सुन्नी आतंकवादी समूह कहा जाता है. पिछले साल 15 दिसंबर को जैश-अल-अदल ने ईरान के दक्षिणपूर्वी सीमा प्रांत सिस्तान-बलूचिस्तान में एक पुलिस स्टेशन पर हमला किया था, जिसमें 11 ईरानी पुलिस अधिकारी और पुलिसकर्मियों की जान चली गई थी. इस आतंकी समूह ने जघन्य घटना को जिम्मेदारी ली थी. इस हमले की पाकिस्तान ने भी निंदा की थी.

जून 2023

पाकिस्तानी सेना की मीडिया विंग इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) ने एक बयान जारी किया और कहा कि सशस्त्र ‘आतंकवादियों’ ने केच जिले के सिंगवान इलाके में एक चौकी पर दो पाकिस्तानी सैनिकों की हत्या कर दी है. पाकिस्तान ने इन हमलावरों के ईरान भाग जाने का आरोप लगाया और गिरफ्तारी के लिए ईरानी अधिकारियों से संपर्क किया.

अप्रैल 2023

पाकिस्तान के ISPR ने एक बार फिर बॉर्डर पर जवानों की हत्या होने का दावा किया. पाकिस्तान का कहना है कि ईरान के हमलावरों ने केच जिले के जलगाई सेक्टर में अचानक धावा बोला और वहां चार सीमा गश्ती जवानों की हत्या कर दी गई.

जनवरी 2023

पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बलूचिस्तान-ईरान बॉर्डर पर चार सुरक्षा अधिकारियों की हत्या की निंदा की. वहीं, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय (MFA) ने पंजगुर जिले के चुकाब सेक्टर में हमले के बाद ईरान से मामले की जांच करने और अपराधियों को चिह्नित करने की मांग की. इस्लामाबाद में ईरानी दूतावास ने भी इस हमले की निंदा की.

सितंबर 2021

पाकिस्तान ने दावा किया कि ईरान की ओर से सीमा पार से गोलीबारी की गई, जिसमें एक सैनिक की मौत हो गई. पाकिस्तान ने इसका आरोप ईरान में ‘आतंकवादियों’ पर लगाया. यह घटना 20 सितंबर को तब हुई, जब दोनों देशों के बीच सुरक्षा चिंताओं की वजह से चार महीने तक बॉर्डर बंद रहने के बाद द्विपक्षीय व्यापार के लिए खोला गया था.

फरवरी 2021 

ईरानी सैनिक दो खुफिया एजेंटों को बचाने के लिए पाकिस्तानी सीमा क्षेत्र में घुस गए थे. इस संबंध में तेहरान ने कहा था कि हमने ‘आतंकवादियों’ को पकड़ा है. 

Image preview

20 अप्रैल 2019 

पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने मीडिया को बताया कि ईरान के ‘आतंकवादियों’ ने बलूचिस्तान में एक बस में यात्रियों पर हमला कर दिया, जिसमें 10 नौसेना अधिकारियों, तीन वायु सेना कर्मचारियों और एक अन्य नागरिक समेत 14 लोगों की मौत हो गई.

6 दिसंबर 2018

ईरानी मीडिया ने बताया कि हमारे दक्षिणी बंदरगाह शहर चाबहार में पुलिस मुख्यालय पर आत्मघाती कार बम हमले में चार पुलिसकर्मी मारे गए हैं और 42 अन्य लोग घायल हो गए. ईरान के तत्कालीन विदेश मंत्री जवाद जरीफ ने ‘विदेश समर्थित आतंकवादियों’ को दोषी ठहराया. इसे पाकिस्तान की ओर इशारा करना माना गया. इस्लामाबाद में विदेश मंत्रालय ने हमले की निंदा की.

16 अक्टूबर 2018

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के खुफिया अधिकारियों समेत 12 ईरानी सुरक्षाकर्मियों का कथित तौर पर अपहरण कर लिया गया. ये घटना पाकिस्तान से सटे दक्षिण-पूर्वी सीमा पर हुई. पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश अल-अदल ने इसकी जिम्मेदारी ली. पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने 12 अपहृतों में से करीब पांच की रिहाई सुनिश्चित करने में ईरान की मदद की.

17 अप्रैल 2018

IRGC ने कहा, सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत के मिर्जावेह शहर में एक सीमा चौकी पर हमला हो गया. ये घटना सीमा पार से हुई. तीन ईरानी सुरक्षाकर्मियों की हत्या कर दी गई.

22 जून 2017

पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने कहा कि वायु सेना ने पुंजगुर क्षेत्र में उड़ रहे एक ईरानी ड्रोन को मार गिराया. यह पहली बार था, जब पाकिस्तान ने किसी ईरानी ड्रोन को मार गिराया.

iran pakistan attack

26 अप्रैल 2017

जैश अल-अदल ने मिर्जावेह में हुए हमले की जिम्मेदारी ली, जिसमें 10 ईरानी सीमा रक्षक मारे गए थे. ईरानी मीडिया ने पुलिस अधिकारियों के हवाले से बताया कि हत्याएं लंबी दूरी की बंदूकों से की गईं और ‘इस हमले के लिए पाकिस्तानी सरकार जिम्मेदार है.’

ईरान ने यह भी दावा किया था कि जैश अल-अदल करीब 2013 से ईरानी सीमा रक्षकों पर हमले कर रहा है. उसने सीमा के पास घात लगाकर 14 ईरानी सैनिकों को मार दिया है. 2014 में ईरानी सेना के करीब पांच जवानों का अपहरण कर लिया गया था. दिसंबर 2010 में चाबहार में एक मस्जिद के पास आत्मघाती हमले में 41 लोग मारे गए थे और 90 अन्य घायल हो गए.

‘पश्चिमी एशिया में टेंशन बढ़ी’

इधर, पाकिस्तान और ईरान के बीच जवाबी हमले से पश्चिम एशिया में भी टेंशन बढ़ गई है. वहां पहले से ही इजरायल ने हमास के खात्मे के लिए गाजा पट्टी में युद्ध छेड़ रखा है. जबकि यमन के हुती विद्रोही और समुद्री लुटेरे लाल सागर में ‘आतंक’ फैला रहे हैं. वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाकर लूट-पाट की जा रही है, जिससे तनाव देखा जा रहा है.

‘पाकिस्तान का विरोध करते हैं बलूच’

उत्तर में बलूचिस्तान की सीमा अफगानिस्तान और पश्चिम में ईरान से सटी हुई है. बलूचिस्तान हमेशा से ही खनिज संसंधानों से संपन्न प्रांत रहा है. बलूच हमेशा पाकिस्तान से अपनी आजादी की मांग करते रहे हैं और अपने इलाके से महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों को निकालने का विरोध करते हैं. पहले यहां पाकिस्तान खनिज संसाधनों का दोहन करता था और बाद में उसने चीन को इसकी अनुमति दे दी, तब से बलूच नागरिकों का विरोध और बढ़ गया है. इसी विरोध के चलते BLA और BLF जैसे संगठन पाकिस्तानी सैन्य बलों और चीनी सैनिकों को निशाना बनाते रहे हैं.

 

#कभ #सनक #क #अपहरण #त #कभ #डरन #शटआउट #व #पच #मक #जब #IranPakistan #बरडर #पर #गरज #बदक