खुद पर शक करना-निगेटिव बातें करना…कहीं आपको इंपोस्टर सिंड्रोम तो नहीं? जानें इसके लक्षण और बचने के उपाय

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इंपोस्टर सिंड्रोम एक मेंटल हेल्थ प्रोब्लम है, जिसमें व्यक्ति खुद की सफलता और क्षमताओं को ही शक की निगाहों से देखने लगता है. इस अवस्था में इंसान अपना आत्मविश्वास खोने लगता है और काफी नेगेटिव बातें करने लगता है. इंपोस्टर सिंड्रोम से जूझने वाला व्यक्ति आगे चलकर एंग्जाइटी और डिप्रेशन का शिकार भी हो सकता है.

इंपोस्टर सिंड्रोम मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी एक ऐसी बीमारी है, जिसे डॉक्टर भी आसानी से नहीं पकड़ पाते हैं. इस मेंटल हेल्थ प्रोब्लम का बुरा प्रभाव व्यक्ति के काम और रिश्तों पर भी पड़ता है. 

इंपोस्टर सिंड्रोम के लक्षण
1. अपनी योग्यता और कौशल का वास्तविक मूल्यांकन करने में असमर्थ होना. 
2. अपनी सफलता का श्रेय बाहरी कारणों को देना. 
3. अपनी परफॉर्मेंस से नाखुश रहना और निंदा करना. 
4. इंसान के मन में इस बात का डर होना कि वो लोगों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाएगा. 
5. खुद के काम पर ही शक करना. 
6. बहुत ज्यादा चुनौतीपूर्ण लक्ष्य निर्धारित करना और चूक जाने पर निराश होना. 

इंपोस्टर सिंड्रोम से बचने के उपाय
1. अपनी भावनाएं साझा करें- आप कैसा महसूस कर रहे हैं इसके बारे में अन्य लोगों से बात करें. नेगेटिव विचार तब पनपने लगते हैं, जब उन्हें छुपाया जाता है और उनके बारे में बात नहीं की जाती. 

2. दूसरों पर ध्यान दें- दूसरों की मदद करने का प्रयास करें. अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति को देखते हैं, जो अजीब या अकेला लगता है तो उसे समूह में लाने की कोशिश करें. इससे आपके अंदर का कॉन्फिडेंस लेवल बढ़ेगा. 

3. अपनी क्षमताओं का आकलन करें- अगर आपको अपनी क्षमताओं पर शक है तो अपनी क्षमताओं का मूल्यांकन करें. अपनी उपलब्धियां लिखें और आप किस चीज में अच्छे हैं इसकी तुलना अपने आत्म-मूल्यांकन से करें. 

4. छोटे कदम उठाएं- काम को पूरी तरह से करने पर ध्यान केंद्रित न करें बल्कि उसे सही तरीके से से करें. ऐसा करने से आप इंपोस्टर सिंड्रोम से छुटकारा पा सकते हैं. 

5. अपने विचारों पर सवाल उठाएं- जैसे ही आप अपनी क्षमताओं का आकलन करना शुरू करते हैं और छोटे कदम उठाते हैं, तो खुद से सवाल करें कि आपके विचार तर्कसंगत हैं या नहीं. 

6. तुलना ना करें- जब आप दूसरों से अपनी तुलना करते हैं तो आप खुद में कुछ दोष पाएंगे, जो आपके अंदर अच्छा ना होने की भावना को बढ़ावा देता है. इसकी जगह बातचीत के दौरान दूसरा व्यक्ति क्या कह रहा है, उसे सुनने पर ध्यान केंद्रित करें और अधिक सीखने में रुचि रखें. 

7. सोशल मीडिया का प्रयोग संयमित ढंग से करें- सोशल मीडिया का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल इंसान के अंदर हीनता की भावना को जन्म देता है. इसलिए सोशल मीडिया का उपयोग कम करें. ऐसा करने से आप कई तरह की मेंटल हेल्थ प्रोब्लम से बचे रहेंगे. 

8. अपनी भावनाओं से लड़ना बंद करें- अपनी भावनाओं से लड़ने की जगह उन्हें स्वीकार करने का प्रयास करें. जब आप इन भावनाओं को स्वीकार करेंगे, तभी मेंटल हेल्थ प्रोब्लम से छुटकारा पा सकेंगे. 

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