जानिए सलाउद्दीन फारूकी और Jaish-Al-Adl की करतूतें, जिससे खफा Iran ने Pakistan पर दागीं मिसाइलें

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ईरान की सेना ने पाकिस्तान में घुसकर एयर स्ट्राइक की है. जिससे पाकिस्तान सकते में आ गया है. दरअसल, पाकिस्तान की जमीन से ईरान के खिलाफ साजिश रचने वाले आतंकी संगठन जैश-अल-अदल को इस एयर स्ट्राइक दौरान निशाना बनाया गया है. ईरान की फौज ने इस आतंकवादी समूह के ठिकानों पर मिसाइलें दागी और उन्हें तबाह कर दिया. अब पाकिस्तान इस स्ट्राइक से बेहद नाराज है. पाकिस्तान का दावा है कि ईरान के हमले में दो बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल भी हुए हैं. यह हमला बलूचिस्तान में मौजूद जैश-अल-अदल के ठिकानों पर किया गया. आइए जान लेते हैं, ईरान में आतंक मचाने वाले इस आतंकी संगठन की कुंडली.

क्या है जैश-अल-अद्ल?
आतंकी संगठन जैश-अल-अदल का मैन ठिकाना पाकिस्तान के बलूचिस्तान में ही है. यह एक सुन्नी सलाफी अलगाववादी आतंकी संगठन है. जैश-अल-अदल का मतलब ‘इंसाफ की फौज’ यानी ‘न्याय की सेना’ होता है. असल में जैश-अल-अदल पहले ग्लोबल टेररिस्ट संगठन जुंदल्लाह का हिस्सा हुआ करता था. लेकिन बाद में ये उससे अलग हो गया था और अपनी पहचान बनाने की कवायद में जुट गया. खास बात ये है कि यह संगठन पाकिस्तान की जमीन से संचालित होता है और ईरान में आतंकी वारदातों को अंजाम देता है. यह संगठन इतना मजबूत बताया जाता है कि इसने ईरान की फौज पर भी हमले किए हैं. 

चार देशों ने लगाया प्रतिबंध
साल 2010 में ईरान ने आतंकी संगठन जुंदाल्लाह के बड़े नेता अब्दोलमलेक रिगी को मार गिराया था. इसके बाद साल 2012 में इस संगठन के सदस्यों ने एक दूसरा संगठन बनाया, जिसे जैश-अल-अदल नाम दिया गया. इस आतंकी संगठन का मुखिया इस वक्त सलाउद्दीन फारूकी है. इस आतंकी संगठन की करतूतों के चलते ही इसे ईरान, जापान, अमेरिका और न्यूजीलैंड ने बैन किया है.

तीन देशों में जैश-अल-अद्ल का असर
इस आतंकी संगठन जैश-अल-अदल के प्रभाव की बात की जाए तो इसका असर तीन देशों में ज्यादा दिखाई देता है. जिनमें ईरान, पाकिस्तान और अफगानिस्तान शामिल है. इस संगठन का मुख्यालय पाकिस्तान के बलूचिस्तान में मौजूद है. वहीं से इसका संचालन किया जाता है. इसकी ज्यादातर गतिविधियां पाकिस्तान सीमा के पास ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में होती हैं. यह संगठन ईरान में कई बड़ी आतंकी वारदातों को अंजाम दे चुका है और वहां कई जगहों पर जानलेवा धमाके भी कर चुका है. 

पुलिस थाने में किया था ब्लास्ट
गौरतलब है कि पिछले साल दिसंबर के महीने में इस आतंकवादी संगठन ने ईरान के सिस्तान इलाके में एक पुलिस स्टेशन को धमाके से उड़ा दिया था. जिसमें 11 पुलिसवालों की दर्दनाक मौत हो गई थी. इस हमले के बाद ईरान ने पाकिस्तान के सामने नाराजगी जाहिर की थी. लेकिन इस बात का कोई ज्यादा असर नहीं दिखाई दिया. 

कुलभूषण जाधव का अपहरण
आतंकी संगठन जैश-अल-अदल को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का खास माना जाता है. पाकिस्तान की जेल में बंद कुलभूषण जाधव को ईरान से पाकिस्तान ले जाने में भी इस संगठन के आतंकवादी शामिल थे. इस संगठन के लोगों ने ही जाधव का ईरान में अगवा किया था और आईएसआई को सौंप दिया था. जाधव को ईरान के चाबहार से किडनैप किया गया था और फिर पाकिस्तान ले जाया गया था. बाद में पाकिस्तान की अदालत ने जाधव को मौत की सजा सुनाई. फिलहाल ये जाधव पाकिस्तान की जेल में बंद है और ये मामला इंटरनेशनल कोर्ट में है.

जैश-अल-अद्ल के हमले
इस आतंकी संगटन ने 25 अगस्त 2012 को पहला हमला किया था. उस हमले में आईआरजीसी के 10 सदस्य मारे गए थे. इसके बाद 25 अक्टूबर 2013 को इस संगठन ने सरवन शहर में 14 ईरानी सीमा रक्षकों की हत्या कर दी थी और इसकी जिम्मेदारी भी ली थी. उस दौरान जैश ने दावा किया था कि वो हमला मौत की सजा पाए 16 बलूच कैदियों का बदला था. उन 16 कैदियों को ड्रग्स की तस्करी और उग्रवाद का दोषी ठहराया गया था.

ईरान ने दी थी 16 कैदियों को फांसी
इस हमले के जवाब में ईरान ने 26 अक्टूबर 2013 को उन 16 कैदियों को फांसी दे दी थी. कुछ हफ्ते बाद 6 नवंबर को दो हमलावरों ने सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत के ज़ाबोल शहर में मूसा नूरी के वाहन पर गोलीबारी की थी. उस हमले में भी कम से कम दो लोग मारे गए थे. जिनमें नूरी, ज़ाबोल शहर के अभियोजक और उनका ड्राइवर शामिल थे.

सीमा रक्षक दल की चौकी पर किया था हमला
जैश-अल-अदल ने हमले के नौ दिन बाद सीमा रक्षक दल पर हमला किया था, जिसमें चौदह रक्षक मारे गए थे और छह अन्य लोग घायल हो गए थे. उसी साल 2 दिसंबर को 16 आतंकियों की हत्या के जवाब में, आतंकवादियों ने सरवन में एक चौकी पर हमला किया था, जिसमें एक गार्ड की मौत हो गई थी और चार घायल हो गए थे.

खदान में किया था विस्फोट
दो हफ्ते बाद, सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत के सरवन शहर में ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के सदस्यों को निशाना बनाते हुए सड़क किनारे एक खदान में विस्फोट किया गया था, जिसमें तीन सैनिक मारे गए थे. जैश अल-अदल ने 16 लड़ाकों की फांसी के बदले में उस हमले की जिम्मेदारी ली थी.

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