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पीएम मोदी की रैली झारखंड में, लेकिन मैसेज राजस्थान-मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ को… जानिए आदिवासी वोटों का गणित

मध्य प्रदेश की 230 और छत्तीसगढ़ की 70 विधानसभा सीटों के लिए 17 नवंबर को वोट डाले जाने हैं. दोनों राज्यों में चुनाव प्रचार का आज यानी 15 नवंबर को अंतिम दिन है. ऐसे में जब प्रचार के अंतिम दिन हर उम्मीदवार, हर दल ने पूरी ताकत झोंक दी है. बड़े चेहरों की ताबड़तोड़ रैलियों के कार्यक्रम हैं तो वहीं भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सबसे बड़े चेहरे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनावी शोर से दूर झारखंड में हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी झारखंड के खूंटी जिले में स्थित उलिहातू पहुंचे जहां आदिवासी समाज में भगवान का दर्जा रखने वाले बिरसा मुंडा का जन्म हुआ था. पीएम मोदी ने खूंटी से आदिवासी कल्याण के लिए 24 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं का ऐलान किया, साथ ही जनजातीय गौरव दिवस पर विकसित भारत संकल्प यात्रा की भी शुरुआत की. दो महीने तक चलने वाली इस यात्रा के जरिए केंद्र सरकार की योजना अपनी उपलब्धियों को जनता तक ले जाने की है.

बिरसा मुंडा के सहारे आदिवासी वोटों का गणित साधने की रणनीति

पांच राज्यों में चुनाव के बीच पीएम मोदी के झारखंड दौरे ने नई चर्चा को जन्म दे दिया है. चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि दो महत्वपूर्ण राज्यों मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में प्रचार थमने को है और चुनाव प्रचार के अंतिम दिन पीएम मोदी इन राज्यों से कहीं दूर झारखंड में क्यों हैं? बीजेपी की पहचान प्लानिंग के साथ चलने वाली पार्टी के रूप में भी है, ऐसे में सवाल ये भी उठ रहे हैं कि इस दौरे के पीछे पीएम मोदी और बीजेपी का प्लान क्या है?

झारखंड में मोदी, चुनावी राज्यों को संदेश

पीएम मोदी भले ही झारखंड में हैं जहां अभी कोई चुनाव नहीं है, लेकिन बीजेपी की रणनीति एक तीर से कई निशाने साधने की है. पीएम मोदी बिरसा मुंडा की जयंती के मौके पर उनकी जन्मभूमि खूंटी जिले के उलिहातू पहुंचे हैं. पीएम मोदी आदिवासी कल्याण के लिए 24 हजार करोड़ की योजनाओं की सौगात भी देने वाले हैं. बिरसा मुंडा की जयंती के साथ ही ये मौका झारखंड के स्थापना दिवस का भी है. उनके इस दौरे को लोकसभा चुनाव से पहले झारखंड साधने की कवायद के साथ ही देशभर के आदिवासी मतदाताओं के लिए भी एक संदेश की तरह देखा जा रहा है.

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दरअसल, बीजेपी के नेता चुनावी राज्यों में मोदी सरकार के समय बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस मनाने की परंपरा को अपनी उपलब्धि के रूप में आदिवासी मतदाताओं के बीच ले जा रहे हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में बीजेपी के बड़े नेताओं ने पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के भी चुनाव में विरोध का जिक्र करते हुए खूब घेरा. अब बिरसा मुंडा के सहारे पार्टी की रणनीति आदिवासी समाज से भावनात्मक जुड़ाव स्थापित करने की है.

चुनावी राज्यों में क्या है आदिवासी वोटों का गणित

बीजेपी की नजर भगवान बिरसा मुंडा के सहारे आदिवासी वोटों का गणित साधने पर है. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सत्ता का ताज तय करने में आदिवासी मतदाता बड़ी भूमिका निभाते हैं. आबादी के लिहाज से देखें तो मध्य प्रदेश में 31, छत्तीसगढ़ में 34, राजस्थान में 17 और तेलंगाना में 9 फीसदी आदिवासी हैं. साल 2018 के चुनाव में बीजेपी ने तीन राज्यों राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सत्ता गंवाई तो इसके लिए भी आदिवासी वोट छिटकने को बड़ी वजह बताया गया.

बीजेपी की रणनीति एक तीर से कई निशाने साधने की (फोटोः ट्विटर)

दरअसल, छत्तीसगढ़ विधानसभा की 90 में से 29 सीटें आदिवासियों के लिए आरक्षित हैं जो कुल सदस्य संख्या की एक तिहाई पहुंचती हैं. इन 29 में से बीजेपी महज चार सीटें ही जीत पाई थी. मध्य प्रदेश की 230 में से 47 और राजस्थान की 25 सीटें आदिवासियों के लिए आरक्षित हैं. कांग्रेस को 2018 के चुनाव में मध्य प्रदेश की 47 में से 30 और राजस्थान की 25 में से 16 सीटों पर जीत मिली थी. बीजेपी की कोशिश अब छिटके आदिवासी मतदाताओं को फिर से अपने साथ लाने की है.

क्या कहते हैं जानकार

राजनीतिक विश्लेषक अमिताभ तिवारी ने कहा कि हिंदी पट्टी के तीनों ही राज्यों में सत्ता तक पहुंचाने में आदिवासी वोटर का, आदिवासी सीटों का रोल सीढ़ी जैसा है. पीएम मोदी का पहले मानगढ़ धाम और अब बिरसा मुंडा की जन्मभूमि पर जाना बीजेपी का स्मार्ट मूव है लेकिन काफी देर हो चुकी है.

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आदिवासी इलाकों तक तकनीक की पहुंच बाकी इलाकों की तरह उतनी नहीं होने के तर्क भी दिए जा रहे हैं. पीएम मोदी के झारखंड दौरे का मैसेज राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ तक जाएगा, ये जानकार भी मान रहे हैं. अब इन चुनावी राज्यों में बीजेपी को इस मूव का कितना लाभ मिल पाता है? ये देखने वाली बात होगी.

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