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Manipur Viral Video Case: मणिपुर में महिलाओं के साथ सरेआम हुई थी दरिंदगी, वायरल वीडियो मामले में 6 के खिलाफ चार्जशीट

Manipur Viral Video Case: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सोमवार को मणिपुर वायरल वीडियो मामले में गुवाहाटी में सीबीआई कोर्ट के विशेष न्यायाधीश के समक्ष छह आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया. साथ ही सीसीएल (CCL) के खिलाफ एक रिपोर्ट भी दायर की है. 

ये वही मामला है, जिसमें दो महिलाओं के यौन उत्पीड़न का एक भयानक वीडियो वायरल होकर सामने आया था, जिसके बाद देश भर में आक्रोश फैल गया था. जिसके बाद विपक्ष ने मोदी सरकार के खिलाफ सदन में अविश्वास प्रस्ताव भी पेश किया था.

महिलाओं को नग्न कर की गई थी छेड़छाड़
दरअसल, जुलाई 2023 में 4 मई का एक वीडियो सामने आया था. जिसमें एक समुदाय की दो महिलाओं को दूसरे पक्ष के कुछ लोग निर्वस्त्र कर सड़कों पर घुमा रहे थे. उस घटना के सामने आने के बाद इलाके में तनाव फैल गया था. अधिकारियों ने बताया था कि वो वीडियो इंडिजिनस ट्राइबल लीडर्स फोरम (ITLF) के प्रदर्शन से ठीक एक दिन पहले शेयर किया जा रहा था. उस वीडियो में महिलाओं को नग्न अवस्था में दिखाया गया था. वीडियो में पुरुष पीड़ित महिलाओं से लगातार छेड़छाड़ करते दिखाई दे रहे हैं. उनके प्राइवेट पार्ट छू  रहे थे. वहीं पीड़ित महिलाएं बंधक बनी हुईं थी और लगातार मदद की गुहार लगा रही थीं. 

इस मामले में किरकिरी होने के बाद मणिपुर सरकार ने जांच सीबीआई के हवाले कर दी थी. इसके बाद सीबीआई ने 21 जून को जांच अपने हाथ में ले ली थी. आरोप था कि 4 मई 2023 को अत्याधुनिक हथियारों से लैस लगभग 900-1000 लोगों की भीड़ मणिपुर के कांगपोकपी जिले के बी. फेनोम गांव में दाखिल हो गई थी और वहां घरों में घुसकर तोड़फोड़ की थी. बाद में घरों को आग के हवाले कर दिया था. संपत्तियों को लूटा गया था और ग्रामीणों पर हमले किए गए थे. 

उसी गुस्साई भीड़ पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न करने और हत्या करने के आरोप भी थे. आगे यह भी आरोप लगा था कि उस घटना में एक पीड़ित के परिवार के दो सदस्य भी मारे गए थे. जिन्हें भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने बेरहमी के साथ कत्ल किया था.

सीबीआई की जांच में पता चला कि आरोपी उक्त घटना में शामिल थे. सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार नामित विशेष न्यायाधीश, सीबीआई कोर्ट, गुवाहाटी के समक्ष उसी दिल दहला देने वाले मामले में एक आरोप पत्र दायर किया गया. हालांकि इस मामले के अन्य पहलुओं की छानबीन के अलावा अपराध में शामिल अन्य आरोपियों की पहचान करने का काम और आगे की जांच अभी जारी है.

उपरोक्त निष्कर्ष सीबीआई द्वारा की गई जांच और उसके द्वारा एकत्र किए गए सबूतों पर आधारित हैं. भारतीय कानून के तहत, आरोपियों को तब तक निर्दोष माना जाता है, जब तक कि निष्पक्ष सुनवाई के बाद उनका अपराध साबित नहीं हो जाता.

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